आज का पद Verse of the Day

मानुस हौं तो वही रसखान, बसौं मिलि गोकुल गाँव के ग्वारन।
जो पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन॥

— रसखान सवैया

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अवधेस के बालक चारि सदा तुलसी-मन-मंदिर में बिहरैं॥

— तुलसीदास / Tulsidas

ब्रज अवधी काव्यलोक के बारे में

About Braj Awadhi Kavyalok

यह संग्रह ब्रज भाषा की काव्य-परंपरा को संजोने का एक प्रयास है — तुलसीदास, सूरदास, रसखान और रसलीन जैसे महाकवियों की रचनाएँ एक स्थान पर।

A digital sanctuary for Braj language poetry — preserving the works of Tulsidas, Surdas, Raskhan, Rasleen and the great poets of the Bhakti tradition.