आई खेलि होरी ब्रजगोरी
आई खेलि होरी ब्रजगोरी वा किसोरी संग
अंग अंग रंगनि अनंग सरसाइगो ।
कुंकुम की मार वा पै रंगनि उछार उड़ै
बुक्का और गुलाल लाल लाल तरसाइगो ।
छोड़ै पिचकारिन धमारिल बिगोह छोड़ै
तोड़ै हियहार धार रँग बरसाइगो ।
रसिक सलोनो रिझवार रसखानि आज
फागुन मैं औगुन अनेक दरसाइगो ॥१२२॥