आई सबै व्रज-गोप लली

Raskhan

आई सबै व्रज-गोप लली ठिठकीं ह्वैं गली जमुना-जल न्हाने ।
औचक आड़ मिले रसखानि बजावत वेनु सुनावत ताने ॥
हा हा करी सिसकीं सिगरी मति मन हरी हियरा हुलसाने ।
घूमें दिवानी अमानी चकोर मों ओर सों दोऊ चलैं दृग वाने ॥१६५॥