आजु सँवारति नेक भटू*

Raskhan

आजु सँवारति नेक भटू* तन मंद करी रति की दुति लाजै ।
देखत रीझि रहे रसखानि सुओर कहा विधि ना उपराजै ।
आये हैं न्यौते तरैयन के मनौ संग पतंग पतंगज राजै ।
ऐसे सखी मुख वागन में तिल तेरे तरौना के तीर विराजै ॥२३६॥