आज अचानक राधिका रूपनिधानि
आज अचानक राधिका रूपनिधानि सों भेंट भई बन माहीं ।
देखत दृष्टि परे रसखानि मिले भरि अंक दिए गलबाहीं ॥
प्रेमपगी बतियाँ दुहुँघाँ की दुहुँ को लगी अतिही चितचाहीं ।
मोहनी मन्त्र वसीकर जन्त्र हहा पिय की तिय की नहिं नाहीं ॥८४॥
आज अचानक राधिका रूपनिधानि सों भेंट भई बन माहीं ।
देखत दृष्टि परे रसखानि मिले भरि अंक दिए गलबाहीं ॥
प्रेमपगी बतियाँ दुहुँघाँ की दुहुँ को लगी अतिही चितचाहीं ।
मोहनी मन्त्र वसीकर जन्त्र हहा पिय की तिय की नहिं नाहीं ॥८४॥