आपनो सो ढोंटा* हम
आपनो सो ढोंटा* हम सबहीं को जानत हैं,
दोऊ प्रानी सबही के काज नित धावहीं ।
ते तौ रसखानि अब दूर तें तमासो देखैं,
तरनितनूजा* के निकट नहि आवहीं ।
आन दिन बात अनहितुन सों कहौं कहा,
हितू जेऊ आए ते ये लोचन दुरावहीं ।
कहा कहौं आली खाली देत सब ठाली पर,
मेरे बनमाली* कौं न काली ते छुड़ावहीं ॥१११॥