आली लला घन सों

Raskhan

आली लला घन सों अति सुन्दर तैसो लसै पियरो उपरैना ।
गंडनि पै छलकै छवि कुंडल मंडित कुन्तल रूप की सैना ।
दीरघ बंक विलोकनि की अवलोकन चोरति चित्त को चैना ।
मो रसखानि रट्यौ चित री मुसकाइ कहे अधरामृत बैना ॥१७५॥