आवत लाल गुपाल लिए

Raskhan

आवत लाल गुपाल लिए मग सूने मिली इक नार नवीनी’ ।
त्यों रसखानि लगाइ हिये भटू मौज कियो मनमाहिं अधीनी ॥
सारी फटी सुकुमारी हटी अँगिया दरकी सरकी रँगभीनी ।
गाल गुलाल लगाइ कै अंक रिझाई बिदा कर दीनी ॥१२०॥