आवत हैं बन तैं
आवत हैं बन तैं मनमोहन गोहन* संग लसै ब्रज ग्वाला ।
बेनु बजावत गावत गीत अमीत* इतै करिगौ कछु ख्याला* ॥
हेरत* टेर थकी चहुँ ओरतें झाँकि झरोखनि तैं ब्रजबाला ।
देख सु आनन के रसखान तज्यो सब को त्रय ताप कसाला* ॥१३६॥
आवत हैं बन तैं मनमोहन गोहन* संग लसै ब्रज ग्वाला ।
बेनु बजावत गावत गीत अमीत* इतै करिगौ कछु ख्याला* ॥
हेरत* टेर थकी चहुँ ओरतें झाँकि झरोखनि तैं ब्रजबाला ।
देख सु आनन के रसखान तज्यो सब को त्रय ताप कसाला* ॥१३६॥