इक ओर किरीट लसै*

Raskhan

इक ओर किरीट लसै* दुसरी दिसि नागन के गन गाजत री ।
मुरली मधुरी ध्वनि ओठन पै उत डामर नाद से बाजत री ॥
रसखानि पितम्बर एक कंधा पर एक बघम्बर राजत री ।
कोउ देखहु संगम लै बुड़की निकसे यह भेख बिराजत री ॥१२६॥