उनहीं के सनेहन सानी

Raskhan

उनहीं के सनेहन सानी रहैं उनहीं के जु नेह दिवानी रहैं ।
उनहों की सुनै न औ बैन त्यों सैन सों चैन अनेकन ठानी रहैं ॥
उनहीं सँग डोलन में रसखानि सबै सुख सिंधु अघानी रहैं ।
उनही बिन ज्यों जलहीन ह्वै मीन सी आँखि मेरी अँसुवानी रहैं ॥३०॥