एक सु तीरथ डोलत

Raskhan

एक सु तीरथ डोलत है इक बार हजार पुरान वके हैं ।
एक लगे जप में तप में इक सिद्ध समाधिन में अटके हैं ।
चेत* जु देखत हौ रसखान सु मूढ़ महा सिगरे* भटके हैं ।
साँचहि वे जिन आपुनपौ यह स्याम गुपाल पै वारि छके* हैं ॥१५७॥