कंचन मन्दिर ऊँचे बनाइकै

Raskhan

कंचन मन्दिर ऊँचे बनाइकै मानिक लाइ सदा झलकैयत ।
प्रातहीं तें सगरी नगरी गजमोतिन ही की तुलानि तुलैयत ॥
जद्यपि दीन प्रजान प्रजा तिनकी प्रभुता मघवा* ललचैयत ।
ऐसे भए तो कहा रसखानि जो साँवरे ग्वाल सों नेह न लैयत ॥१०२॥