कंस कुढ्यौ सुनि बानी
कंस कुढ्यौ सुनि बानी अकास की ज्यावनहारहि मारन धायौ ।
भादव साँवरी आठई कौं रसखान महाप्रमु देवकी जायौ ।
रैंनि अँधेरी में लै वसुदेव महावन में अरगै धरि आयौ ।
काहु न चौजुग जागत पायौ सो राति जसोमति सोवत पायौ ॥१५४॥
कंस कुढ्यौ सुनि बानी अकास की ज्यावनहारहि मारन धायौ ।
भादव साँवरी आठई कौं रसखान महाप्रमु देवकी जायौ ।
रैंनि अँधेरी में लै वसुदेव महावन में अरगै धरि आयौ ।
काहु न चौजुग जागत पायौ सो राति जसोमति सोवत पायौ ॥१५४॥