कल कानन कुण्डल मोरपखा

Raskhan

कल कानन कुण्डल मोरपखा उर पैं बनमाल बिराजति है ।
मुरली कर में अधरा मुसकानि तरंग महाछबि छाजति है ॥
रसखानि लखै तन पीतपटा सत दामिनी की दुति* लाजति है ।
वह बाँसुरी की धुनि कान परैं कुलकानि हियो तजि भाजति है ॥२५॥