कहा रसखानि सुखसंपति सुमार

Raskhan

कहा रसखानि सुखसंपति सुमार कहा,
कहा तन जोगी ह्वै लगाए अंग छार को ।
कहा साधे पंचानल कहा सोए बीच नल,
कहा जीत लाए राज सिंधु आर पार को ।
जप बार बार तप संजम बयार ब्रत,
तीरथ हजार अरे बूझत लवार को ।
होन्हीं नहीं प्यार सेयो दरबार चित,
चाह्यो न निहारो जो पै नन्द के कुमार को ॥१०३॥