कातिक क्वार के प्रात
कातिक क्वार के प्रात ही प्रात सरोज किते विकसात निहारे ।
डीठि परे रतनागर के दरके बहु दाड़िम विम्ब विचारे ॥
लाल सु जीव जिते रसखानि ते रंगनि तोलनि मोलनि भारे ।
राधिका श्रीमुरलीधर की मधुरी मुसकानि के ऊपर वारे ॥१७९॥
कातिक क्वार के प्रात ही प्रात सरोज किते विकसात निहारे ।
डीठि परे रतनागर के दरके बहु दाड़िम विम्ब विचारे ॥
लाल सु जीव जिते रसखानि ते रंगनि तोलनि मोलनि भारे ।
राधिका श्रीमुरलीधर की मधुरी मुसकानि के ऊपर वारे ॥१७९॥