काल्हि पर्यो मुरली धुनि
काल्हि पर्यो मुरली धुनि में रसखान जू कानन नाम हमारो ।
ता छिन’ तैं नहिं धीर रह्यो जग जानि महा मन कीनो पवाँरो’ ॥
गाँवन गाँवन में अब तो बदनाम भई ‘सबसों कै किनारो ।
तौ सजनी फिरि फेरि कहौं पिय मेरो यही जग ठोंकि नगारो ॥१४८॥
काल्हि पर्यो मुरली धुनि में रसखान जू कानन नाम हमारो ।
ता छिन’ तैं नहिं धीर रह्यो जग जानि महा मन कीनो पवाँरो’ ॥
गाँवन गाँवन में अब तो बदनाम भई ‘सबसों कै किनारो ।
तौ सजनी फिरि फेरि कहौं पिय मेरो यही जग ठोंकि नगारो ॥१४८॥