काल्हि भटू मुरली धुनि
काल्हि भटू मुरली धुनि में रसखानि लियौ कहूँ नाम हमारौ ।
ता छिन ते भई वैरिणि सास कितौ कियौ झाँकन देति न द्वारौ ॥
होत चवाव* वलाई सों आली री जौं भरि आँखिन भेंटिये प्यारौ ।
वाट परी* अब री ठिठक्यौ* हियरे अटक्यौ पियरे पटवारौ ॥१८७॥
काल्हि भटू मुरली धुनि में रसखानि लियौ कहूँ नाम हमारौ ।
ता छिन ते भई वैरिणि सास कितौ कियौ झाँकन देति न द्वारौ ॥
होत चवाव* वलाई सों आली री जौं भरि आँखिन भेंटिये प्यारौ ।
वाट परी* अब री ठिठक्यौ* हियरे अटक्यौ पियरे पटवारौ ॥१८७॥