कुंजनि कुंजनि गुंज के
कुंजनि कुंजनि गुंज के पुंजनि* मंजु लतानि सौं माल बनैवो ।
मालती मल्लिका कुंद सौं गूँदि हरा हरि के हियरा पहिरैवो ॥
आली कबै इन भावने भाइन आपुन रीझि कै प्यारे रिझैवो ।
माइ झकै हरि हाँकरिवो रसखानि तकैं फिरि कै मुसकैवो ॥१९१॥
कुंजनि कुंजनि गुंज के पुंजनि* मंजु लतानि सौं माल बनैवो ।
मालती मल्लिका कुंद सौं गूँदि हरा हरि के हियरा पहिरैवो ॥
आली कबै इन भावने भाइन आपुन रीझि कै प्यारे रिझैवो ।
माइ झकै हरि हाँकरिवो रसखानि तकैं फिरि कै मुसकैवो ॥१९१॥