कैसो मनोहर बानक मोहन
कैसो मनोहर बानक मोहन सोहन सुन्दर काम ते आली ।
जाहि विलोकत लाज तजी कुल छूटो है नैननि की चल चाली ।
अधरा मुसकान तरंग लसैं रसखानि सुहाइ महाछवि छाली ।
कुंज गली मधि मोहन सोहन देख्यौ सखी वह रूप-रसाली ॥१६९॥
कैसो मनोहर बानक मोहन सोहन सुन्दर काम ते आली ।
जाहि विलोकत लाज तजी कुल छूटो है नैननि की चल चाली ।
अधरा मुसकान तरंग लसैं रसखानि सुहाइ महाछवि छाली ।
कुंज गली मधि मोहन सोहन देख्यौ सखी वह रूप-रसाली ॥१६९॥