को रिझवारिन कों रसखानि

Raskhan

को रिझवारिन कों रसखानि कहै मुकतानि सों माँग भरौंगी ।
कोऊ कहै गहनो अँग अँग दुकूल सुगन्ध भर्यों पहरौंगी ।
तू न कहै यों कहैं तौ कहौ हूँ कहूँ न कहूँ तेरे पाँय परौंगी ।
देखहु याहि सुफूल की माल जसोमति लाल निहाल करौंगी ॥११४॥