कौन की नागरि रूपकी

Raskhan

कौन की नागरि रूपकी आगरि जाति लिए सँग कौन की बेटी ।
जाको लसै मुख चंद समान सु कोमल अंगनि रूप-लपेटी ॥
लाल रहौ चुप लागि है डोठि सु जाके कहूँ उर वात न मेटी ।
टोकत ही टटकार लगी रसखानि भई मनों कारिख-पेटी ॥१८१॥