कौन को लाल सलोनो

Raskhan

कौन को लाल सलोनो सखी वह जाकी बड़ी अँखियाँ अनियारी ।
जोहन बाँक बिसाल के बाननि बेधत हैं घट तीछन भारी ॥
रसखानि सम्हारि परै नहिं चोट सु कोटि उपाय करौं सुखकारी ।
भाल लिख्यो बिधि हेत को बंधन खोलि सकैं अस को हितकारी ॥४१॥