खंजन मीन सरोजन को

Raskhan

खंजन मीन सरोजन को मृग को मद गंजन दीरघ नैना ।
कुंजन ते निकस्यौ मुसकात मु पान पर्यौ मुख अमृत बैना ।
जाइ रहे मन प्रान विलोचन कानन में रुचि मानत चैना ।
रसखानि कर्यौ घर मो हिय में निसिवासर एक पलौ निकसै ना ॥१७३॥