खेलिये फाग निसंक ह्वै
खेलिये फाग निसंक ह्वै आज मयंक मुखी* कहे भाग हमारो ।
तेहु गुलाल छुआ कर में पिचकारिन मैं रंग हिय मँह डारो ॥
भावे सु मोहि करो रसखाव जू पाँव परों जनि घूँघट टारो ।
वीर की सौंह हाँ देखि हाँ कैसे अबीर तो आँखि वचाय के डारो ॥२१३॥
खेलिये फाग निसंक ह्वै आज मयंक मुखी* कहे भाग हमारो ।
तेहु गुलाल छुआ कर में पिचकारिन मैं रंग हिय मँह डारो ॥
भावे सु मोहि करो रसखाव जू पाँव परों जनि घूँघट टारो ।
वीर की सौंह हाँ देखि हाँ कैसे अबीर तो आँखि वचाय के डारो ॥२१३॥