गावैं गुनी गनिका* गन्धर्ब*

Raskhan

गावैं गुनी गनिका* गन्धर्ब* औ सारद सेस सबै गुन गावत ।
नाम अनंत गनंत गनेस ज्यों ब्रह्मा त्रिलोचन पार न पावत ॥
जोगी जती तपसी अरु सिद्ध निरंतर जाहि समाधि लगावत ।
ताहि अहीर की छोहरियाँ* छछिया* भरि छाछ पै नाच नचावत ॥५॥