गुंजरें सिर मोरपखा अरु
गुंजरें सिर मोरपखा अरु चाल गयंद की मो मन भावे ।
साँवरो नन्दकुमार सबै व्रजमण्डली मैं व्रजराज कहावे ।
साज समाज सबै सिरताज औ लाज की बात नहीं कहि आवे ।
ताहि अहीर की छोहरियाँ छछिया भर छाछ पै नाच नचावे ॥१५३॥
गुंजरें सिर मोरपखा अरु चाल गयंद की मो मन भावे ।
साँवरो नन्दकुमार सबै व्रजमण्डली मैं व्रजराज कहावे ।
साज समाज सबै सिरताज औ लाज की बात नहीं कहि आवे ।
ताहि अहीर की छोहरियाँ छछिया भर छाछ पै नाच नचावे ॥१५३॥