गोकुल नाथ बियोग प्रलै
गोकुल नाथ बियोग प्रलै जिमि गोपिन नंद जसोमति जू पर ।
बाहि गयौ अँसुवान प्रवाह भयौ जल में व्रजलोक तिहू पर ।
तीरथराज सी राधिका प्रान सु तो रसखान मनौँ व्रज भू पर ।
पूरन ब्रह्म ह्वै ध्यान रह्यौ पिय औधि* अखैवट* पात के ऊपर ॥२२९॥
गोकुल नाथ बियोग प्रलै जिमि गोपिन नंद जसोमति जू पर ।
बाहि गयौ अँसुवान प्रवाह भयौ जल में व्रजलोक तिहू पर ।
तीरथराज सी राधिका प्रान सु तो रसखान मनौँ व्रज भू पर ।
पूरन ब्रह्म ह्वै ध्यान रह्यौ पिय औधि* अखैवट* पात के ऊपर ॥२२९॥