ग्वालन सँग जैबो बन

Raskhan

ग्वालन सँग जैबो बन ऐबो सुगाइन सँग
हेरि तान गैबो हाहा नैन फरकत हैं ।
ह्यौं के गजमोती माल वारौं गुंजमालन पै
कुंज सुधि आए हाय प्रान धरकत हैं ।
गोबर को गारो सुतौ मोहि लगै प्यारो
कहा भयो महल सोने को जटत मरकत हैं ।
मन्दिर तें ऊँचे यह मन्दिर हैं द्वारिका के
ब्रज के खिरक मेरे हिए खरकत हैं ॥९९॥