चंदन खोर पै बिन्दु
चंदन खोर पै बिन्दु लगाय कै कुंजन तें निकस्यौ मुसकातो ।
राजत है वनमाल गरे अरु मोरपखा सिर पै फहरातो ॥
मैं जव तैं रसखान विलोकति ही कछू और न मोहि सुहातो ।
प्रीति की रीति में लाज कहा सखि हैं सब सों बड़ नेह को नातो ॥१९३॥
चंदन खोर पै बिन्दु लगाय कै कुंजन तें निकस्यौ मुसकातो ।
राजत है वनमाल गरे अरु मोरपखा सिर पै फहरातो ॥
मैं जव तैं रसखान विलोकति ही कछू और न मोहि सुहातो ।
प्रीति की रीति में लाज कहा सखि हैं सब सों बड़ नेह को नातो ॥१९३॥