जमुना-तट वी गई जब
जमुना-तट वी गई जब तैं तब तैं जग के मन माँझ तहाँ ।
व्रज मोहन गोहन* लागि भटू हौं लटू भई* लूट सी लाख लहूँ ॥
रसखानि लला ललचाय रहे गति आपनी हौं कहि कासों कहूँ ।
जिय आवत यों अवतौ सब भाँति निसंक ह्वै अंक लगाय रहूँ ॥१९६॥
जमुना-तट वी गई जब तैं तब तैं जग के मन माँझ तहाँ ।
व्रज मोहन गोहन* लागि भटू हौं लटू भई* लूट सी लाख लहूँ ॥
रसखानि लला ललचाय रहे गति आपनी हौं कहि कासों कहूँ ।
जिय आवत यों अवतौ सब भाँति निसंक ह्वै अंक लगाय रहूँ ॥१९६॥