जात हुती* जमुना जल
जात हुती* जमुना जल को मनमोहन घेरि लियो मग आय कै ।
मोद भर्यो लपटाय गयो पट घूँघट टार दियो चित चाय कै ॥
ओर कहा रसखान कहाँ मुख चमत घातन* बात बनाय कै ।
कौन निभै कुलकानि किये हिये साँवरी मूरत की छवि छाय कै ॥१४३॥
जात हुती* जमुना जल को मनमोहन घेरि लियो मग आय कै ।
मोद भर्यो लपटाय गयो पट घूँघट टार दियो चित चाय कै ॥
ओर कहा रसखान कहाँ मुख चमत घातन* बात बनाय कै ।
कौन निभै कुलकानि किये हिये साँवरी मूरत की छवि छाय कै ॥१४३॥