जानत हौं न कछू

Raskhan

जानत हौं न कछू हम हौं उन हौं पढ़ि मंत्र कहा धौं दयो है ।
साँची कहैं जिय में निज जानिके जानती हो जस जैसे लयो है ॥
रसखान यहै सुनिकै गुनिकै हियरा सत टूक ह्वै फाटि गयो है ।
लोग