जोग सिखावत आवत है

Raskhan

जोग सिखावत आवत है वह कौन कहावत को है कहाँ को ।
जानति हैं वर* नागर है पर नेकहु भेद लख्यौ नहि हयाँ को ।
जानति ना हम और कछू मुख देखि जियैं नित नन्दलला को ।
जात नहीं रसखानि हमें तजि राखनहारी है मोरपखा को ॥२३४॥