जो कवहूँ मग पाँव

Raskhan

जो कवहूँ मग पाँव न देति सुतौ हित लालन आपुन गौने ।
मेरो कह्यौ करि मान तज्यौ कहि मोहन सों बोलौ बोल सलौने ।
सौंह दिवावत हाँ रसखानि तू सौंहूँ करे किन लाखन लौने ।
अनौखी तू मानिनी मान कर्यो किन मान बसंत में कीनौ है कौने ॥२५०॥