जो रसना* रस ना
जो रसना* रस ना बिलसै* तेहि देहु सदा निज नाम उचारन ।
सो करनी कर नीको कर जु पै कुंज कुटीरन* देहुँ बुहारन ॥
सिद्धि समृद्धि सबै रसखानि लहौं ब्रज रेणुका अंग सँवारन* ।
खास निवास मिलै तो सही उहि कालिन्दी फूल कदम्ब की डारन ॥१३०॥
जो रसना* रस ना बिलसै* तेहि देहु सदा निज नाम उचारन ।
सो करनी कर नीको कर जु पै कुंज कुटीरन* देहुँ बुहारन ॥
सिद्धि समृद्धि सबै रसखानि लहौं ब्रज रेणुका अंग सँवारन* ।
खास निवास मिलै तो सही उहि कालिन्दी फूल कदम्ब की डारन ॥१३०॥