तुम चाहो कहौ सो
तुम चाहो कहौ सो कहौ हम तौ नन्दवारे के संग ठई सो ठई* ।
तुम ही कुलवीने* प्रवीने सबै हम ही कुछ छाँड़ि गई सो गई ॥
रसखान यों प्रीत की रीति नई सु कलंक की मोटें लई सो लई ।
यह गाँव के पासी हँसें सो हँसें हम स्याम की दासी भई सो भई ॥१९०॥
तुम चाहो कहौ सो कहौ हम तौ नन्दवारे के संग ठई सो ठई* ।
तुम ही कुलवीने* प्रवीने सबै हम ही कुछ छाँड़ि गई सो गई ॥
रसखान यों प्रीत की रीति नई सु कलंक की मोटें लई सो लई ।
यह गाँव के पासी हँसें सो हँसें हम स्याम की दासी भई सो भई ॥१९०॥