तू मरवाइ* कहा झगरै
तू मरवाइ* कहा झगरै रसखानि तेरे बस बावरो होसै ।
तौहूँ न छाती सिराइ* अरी करि झारइतै उतै बाझन कोसै ॥
लालहि लाल किए अँखियाँ गहि लालहि काल सों क्यों भई रोसै ।
ऐ विधिना तू कहा री पढ़ी बस राख्यौ गुपालहि लाल भरोसै ॥११७॥
तू मरवाइ* कहा झगरै रसखानि तेरे बस बावरो होसै ।
तौहूँ न छाती सिराइ* अरी करि झारइतै उतै बाझन कोसै ॥
लालहि लाल किए अँखियाँ गहि लालहि काल सों क्यों भई रोसै ।
ऐ विधिना तू कहा री पढ़ी बस राख्यौ गुपालहि लाल भरोसै ॥११७॥