तेरी गली में जा
तेरी गली में जा दिन तें निकसे मनमोहन गोधन गावत ।
ये ब्रज लोग सो कौन सी बात चलाइ के जो नहि नैन चलावत ॥
वे रसखानि जो रीझिहें नेकु तो रीझिकै क्यों नवनारि रिझावत ।
बावरी जो पै कलंक लग्यो तो निसंक ह्वै क्यों नहीं अंक लगावत ॥८०॥
तेरी गली में जा दिन तें निकसे मनमोहन गोधन गावत ।
ये ब्रज लोग सो कौन सी बात चलाइ के जो नहि नैन चलावत ॥
वे रसखानि जो रीझिहें नेकु तो रीझिकै क्यों नवनारि रिझावत ।
बावरी जो पै कलंक लग्यो तो निसंक ह्वै क्यों नहीं अंक लगावत ॥८०॥