दूर तें आइ दुरैहौं
दूर तें आइ दुरैहौं दिखाई अटा चढ़ जाइ कह्यौ तहाँ बारी ।
चित्त कहूँ चितवै कितहूँ चित और सों चाहि करै चखवारी ॥
रसखानि कहै यह बीच अचांनक जाइ सिढ़ी चढ़ि सास पुकारी ।
सूखि गई सुकवार हियो हनि सैन भटू कह्यौ स्याम सिधारी ॥१०९॥
दूर तें आइ दुरैहौं दिखाई अटा चढ़ जाइ कह्यौ तहाँ बारी ।
चित्त कहूँ चितवै कितहूँ चित और सों चाहि करै चखवारी ॥
रसखानि कहै यह बीच अचांनक जाइ सिढ़ी चढ़ि सास पुकारी ।
सूखि गई सुकवार हियो हनि सैन भटू कह्यौ स्याम सिधारी ॥१०९॥