देखिहौं आँखिन सों पिय
देखिहौं आँखिन सों पिय को अरु कानन सों उन बैन कों प्यारी ।
बाँके अनंगनि रंगनि की सुरभी न सुगंधनि नाक में डारी ॥
त्यों रसखानि हिए में धरी बहि साँवरी मूरति मैं न उजारी ।
गाँव भरी कोउ नाव धरौ पुनि साँवरी हौं बनिहौं सुकुमारी ॥११५॥
देखिहौं आँखिन सों पिय को अरु कानन सों उन बैन कों प्यारी ।
बाँके अनंगनि रंगनि की सुरभी न सुगंधनि नाक में डारी ॥
त्यों रसखानि हिए में धरी बहि साँवरी मूरति मैं न उजारी ।
गाँव भरी कोउ नाव धरौ पुनि साँवरी हौं बनिहौं सुकुमारी ॥११५॥