धूर भरे अति शोभित

Raskhan

धूर भरे अति शोभित स्याम जू तैसी बनी सिर सुन्दर चोटी ।
खेलत खात फिरैं अँगना पग पैंजनी बाजती, पीरी कछौटी ॥
वा छबि को रसखानि बिलोकत वारत काम