नन्द को नन्दन है
नन्द को नन्दन है दुख कन्दन’ प्रेम के फन्दन बाँधि लई हाँ ।
एक दिना व्रजराज के मन्दिर मेरी अली इक वार गई हाँ ॥
हेर्यौ लला लचकाइ कै मो तन जोहन की चकडोर भई हाँ ।
दौरी फिरौं दृग डोरनि मैं हिय मैं अनुराग की वेलि बई हाँ ॥२६६॥
नन्द को नन्दन है दुख कन्दन’ प्रेम के फन्दन बाँधि लई हाँ ।
एक दिना व्रजराज के मन्दिर मेरी अली इक वार गई हाँ ॥
हेर्यौ लला लचकाइ कै मो तन जोहन की चकडोर भई हाँ ।
दौरी फिरौं दृग डोरनि मैं हिय मैं अनुराग की वेलि बई हाँ ॥२६६॥