पहिले दधि लै गई
पहिले दधि लै गई गोकुल में चख चारि भए नट नागर पै ।
रसखान करी उन चातुरता कहैं दान दै दान, खरे अर* पै ॥
नख तैं सिख लौं पट नील लपेटे’, लली सब भाँति कँपै डरपै ।
जनु दामिनी सावन के घन तैं, निकसै नहीं भीतर ही तरपै ॥१५१॥
पहिले दधि लै गई गोकुल में चख चारि भए नट नागर पै ।
रसखान करी उन चातुरता कहैं दान दै दान, खरे अर* पै ॥
नख तैं सिख लौं पट नील लपेटे’, लली सब भाँति कँपै डरपै ।
जनु दामिनी सावन के घन तैं, निकसै नहीं भीतर ही तरपै ॥१५१॥