प्यारी पै जाइ कितौ
प्यारी पै जाइ कितौ परि पाइ पची समझाइ सखी की साँ वैना ।
वारक नन्दकिसोर की ओर कह्यौ दृग छोर की कोर करै ना ॥
ह्वै निकस्यौ रसखान कहूँ उत डीठ पर्यौ पियरो उपरैना* ।
जीव सो पाय गई पचिव्राय* कियौ रुचि नेह गये ललि नैना ॥२००॥
प्यारी पै जाइ कितौ परि पाइ पची समझाइ सखी की साँ वैना ।
वारक नन्दकिसोर की ओर कह्यौ दृग छोर की कोर करै ना ॥
ह्वै निकस्यौ रसखान कहूँ उत डीठ पर्यौ पियरो उपरैना* ।
जीव सो पाय गई पचिव्राय* कियौ रुचि नेह गये ललि नैना ॥२००॥