प्रान वही जु रहैं

Raskhan

प्रान वही जु रहैं रिझि वापर रूप वही लिहिं वाहि रिझायो ।
सीस वही जिन वे परसे पद अंक वही जिन वा परसायो ॥
दूध वही जु दुहायो री वाही दही सु सही जो वही ढरकायो ।
और कहाँ लौं कहौं रसखानि री भाव वही जु वही मनभायो ॥१०१॥