प्रेम कथानि की बात

Raskhan

प्रेम कथानि की बात चलै चमकै चित चंचलता चिनगारी ।
लोचन बंक विलोकनि लोलनि बोलनि मैं वतिया रसकारी ।
सोहूँ तरंग अनंग को अँगनि कोमल यों झमकै झनकारी ।
पूतरी खेलत ही पटकी रसखानि सु चौपर खेलत प्यारी ॥२१९॥