बनें कान कुंडल मोरपखा

Raskhan

बनें कान कुंडल मोरपखा उर पै वनमाल विराजति है ।
मुरली कर में अधरा मुसिक्याँनि तरंग महा छवि छाजति* है ॥
रसखानि लसै तन पीत पटा सत दामिनि की दुति लाजति है ।
वह वाँसुरी की धुनि कान परै कुलकाँनि हियौ तजि भाजति है ॥२५३॥