बाँकी बड़ी अँखियाँ बड़रारे'

Raskhan

बाँकी बड़ी अँखियाँ बड़रारे’ कपोलनि बोलनि कोकिल बानी ।
सुन्दर हास’ सुवानिधि सो मुख मूरति रंग सुधारस-सानी ।
ऐसी नवेली ने देखे कहूँ व्रजराज लला अति हो सुखदानी ।
डोलति है वन वीथिन मैं रसखानि मनोहर’ रूप-लुभानी ॥१६३॥